महाभारत 3.75.7
अयं चरति लोकेऽस्मिन्भूतसाक्षी सदागतिःएष मुञ्चतु मे प्राणान्यदि पापं चराम्यहम्
ayaṃ carati loke'sminbhūtasākṣī sadāgatiḥeṣa muñcatu me prāṇānyadi pāpaṃ carāmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें