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महाभारत 3.76.17
बृहदश्व उवाच · bṛhadaśva uvāca
एवमुक्त्वा ददौ विद्यामृतुपर्णाय नैषधःस च तां प्रतिजग्राह विधिदृष्टेन कर्मणा
evamuktvā dadau vidyāmṛtuparṇāya naiṣadhaḥsa ca tāṃ pratijagrāha vidhidṛṣṭena karmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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