महाभारत 3.76.18ततो गृह्याश्वहृदयं तदा भाङ्गस्वरिर्नृपःसूतमन्यमुपादाय ययौ स्वपुरमेव हिtato gṛhyāśvahṛdayaṃ tadā bhāṅgasvarirnṛpaḥsūtamanyamupādāya yayau svapurameva hiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें