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महाभारत 3.77.23
सौभ्रात्रं चैव मे त्वत्तो न कदाचित्प्रहास्यतिपुष्कर त्वं हि मे भ्राता संजीवस्व शतं समाः
saubhrātraṃ caiva me tvatto na kadācitprahāsyatipuṣkara tvaṃ hi me bhrātā saṃjīvasva śataṃ samāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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