महाभारत 3.77.24
एवं नलः सान्त्वयित्वा भ्रातरं सत्यविक्रमःस्वपुरं प्रेषयामास परिष्वज्य पुनः पुनः
evaṃ nalaḥ sāntvayitvā bhrātaraṃ satyavikramaḥsvapuraṃ preṣayāmāsa pariṣvajya punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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