महाभारत 3.77.26
कीर्तिरस्तु तवाक्षय्या जीव वर्षायुतं सुखीयो मे वितरसि प्राणानधिष्ठानं च पार्थिव
kīrtirastu tavākṣayyā jīva varṣāyutaṃ sukhīyo me vitarasi prāṇānadhiṣṭhānaṃ ca pārthiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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