महाभारत 3.77.4ततः पुष्करमासाद्य वीरसेनसुतो नलःउवाच दीव्याव पुनर्बहु वित्तं मयार्जितम्tataḥ puṣkaramāsādya vīrasenasuto nalaḥuvāca dīvyāva punarbahu vittaṃ mayārjitamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें