महाभारत 3.79.22
तमृते फल्गुनं वीरं न लभे काम्यके धृतिम्शून्यामिव च पश्यामि तत्र तत्र महीमिमाम्
tamṛte phalgunaṃ vīraṃ na labhe kāmyake dhṛtimśūnyāmiva ca paśyāmi tatra tatra mahīmimām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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