महाभारत 3.8.5
अथ पश्याम्यहं पार्थान्प्राप्तानिह कथंचनपुनः शोषं गमिष्यामि निरासुर्निरवग्रहः
atha paśyāmyahaṃ pārthānprāptāniha kathaṃcanapunaḥ śoṣaṃ gamiṣyāmi nirāsurniravagrahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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