महाभारत 3.8.8
सत्यवाक्ये स्थिताः सर्वे पाण्डवा भरतर्षभपितुस्ते वचनं तात न ग्रहीष्यन्ति कर्हिचित्
satyavākye sthitāḥ sarve pāṇḍavā bharatarṣabhapituste vacanaṃ tāta na grahīṣyanti karhicit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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