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महाभारत 3.81.112
ऋषिरुवाचत्वत्प्रसादान्महादेव तपो मे न क्षरेत वै
ṛṣiruvācatvatprasādānmahādeva tapo me na kṣareta vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंऋषिरुवाचत्वत्प्रसादान्महादेव तपो मे न क्षरेत वै
ṛṣiruvācatvatprasādānmahādeva tapo me na kṣareta vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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