महाभारत 3.81.134
व्रतोपनयनाभ्यां वा उपवासेन वा द्विजःक्रियामन्त्रैश्च संयुक्तो ब्राह्मणः स्यान्न संशयः
vratopanayanābhyāṃ vā upavāsena vā dvijaḥkriyāmantraiśca saṃyukto brāhmaṇaḥ syānna saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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