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महाभारत 3.81.155
ततः स्थाणुवटं गच्छेत्त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्तत्र स्नात्वा स्थितो रात्रिं रुद्रलोकमवाप्नुयात्
tataḥ sthāṇuvaṭaṃ gacchettriṣu lokeṣu viśrutamtatra snātvā sthito rātriṃ rudralokamavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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