महाभारत 3.81.168
पृथिव्यां यानि तीर्थानि अन्तरिक्षचराणि चनद्यो नदास्तडागाश्च सर्वप्रस्रवणानि च
pṛthivyāṃ yāni tīrthāni antarikṣacarāṇi canadyo nadāstaḍāgāśca sarvaprasravaṇāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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