महाभारत 3.81.19
तत्रैव च महाराज यक्षी लोकपरिश्रुतातां चाभिगम्य राजेन्द्र पुण्याँल्लोकानवाप्नुयात्
tatraiva ca mahārāja yakṣī lokapariśrutātāṃ cābhigamya rājendra puṇyām̐llokānavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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