महाभारत 3.81.43
ततो गच्छेत धर्मज्ञ ब्रह्मावर्तं नराधिपब्रह्मावर्ते नरः स्नात्वा ब्रह्मलोकमवाप्नुयात्
tato gaccheta dharmajña brahmāvartaṃ narādhipabrahmāvarte naraḥ snātvā brahmalokamavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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