महाभारत 3.81.55
मानुषस्य तु पूर्वेण क्रोशमात्रे महीपतेआपगा नाम विख्याता नदी सिद्धनिषेविता
mānuṣasya tu pūrveṇa krośamātre mahīpateāpagā nāma vikhyātā nadī siddhaniṣevitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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