महाभारत 3.81.78
ततो व्यासवनं गच्छेन्नियतो नियताशनःमनोजवे नरः स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्
tato vyāsavanaṃ gacchenniyato niyatāśanaḥmanojave naraḥ snātvā gosahasraphalaṃ labhet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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