महाभारत 3.81.82
कृतो देवैश्च राजेन्द्र पुनरुत्थापितस्तदाअभिगम्य स्थलीं तस्य गोसहस्रफलं लभेत्
kṛto devaiśca rājendra punarutthāpitastadāabhigamya sthalīṃ tasya gosahasraphalaṃ labhet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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