महाभारत 3.82.112
ततस्तु वामनं गत्वा सर्वपापप्रमोचनम्अभिवाद्य हरिं देवं न दुर्गतिमवाप्नुयात्
tatastu vāmanaṃ gatvā sarvapāpapramocanamabhivādya hariṃ devaṃ na durgatimavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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