महाभारत 3.82.116
तत्र विश्वेश्वरं दृष्ट्वा देव्या सह महाद्युतिम्मित्रावरुणयोर्लोकानाप्नोति पुरुषर्षभ
tatra viśveśvaraṃ dṛṣṭvā devyā saha mahādyutimmitrāvaruṇayorlokānāpnoti puruṣarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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