महाभारत 3.82.12दिव्यं वर्षसहस्रं हि शाकेन किल सुव्रतआहारं सा कृतवती मासि मासि नराधिपdivyaṃ varṣasahasraṃ hi śākena kila suvrataāhāraṃ sā kṛtavatī māsi māsi narādhipaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें