महाभारत 3.82.132
तत्राभिषेकं कुर्वाणः पितृदेवार्चने रतःहयमेधमवाप्नोति शक्रलोकं च गच्छति
tatrābhiṣekaṃ kurvāṇaḥ pitṛdevārcane rataḥhayamedhamavāpnoti śakralokaṃ ca gacchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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