महाभारत 3.82.17
वरांश्च सुबहूँल्लेभे दैवतेषु सुदुर्लभान्उक्तश्च त्रिपुरघ्नेन परितुष्टेन भारत
varāṃśca subahūm̐llebhe daivateṣu sudurlabhānuktaśca tripuraghnena parituṣṭena bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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