महाभारत 3.82.19
तत्राभिगम्य राजेन्द्र पूजयित्वा वृषध्वजम्अश्वमेधमवाप्नोति गाणपत्यं च विन्दति
tatrābhigamya rājendra pūjayitvā vṛṣadhvajamaśvamedhamavāpnoti gāṇapatyaṃ ca vindati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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