महाभारत 3.82.32
ततो गच्छेत राजेन्द्र सुगन्धां लोकविश्रुताम्सर्वपापविशुद्धात्मा ब्रह्मलोके महीयते
tato gaccheta rājendra sugandhāṃ lokaviśrutāmsarvapāpaviśuddhātmā brahmaloke mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें