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महाभारत 3.82.41
सिन्धोश्च प्रभवं गत्वा सिद्धगन्धर्वसेवितम्तत्रोष्य रजनीः पञ्च विन्द्याद्बहु सुवर्णकम्
sindhośca prabhavaṃ gatvā siddhagandharvasevitamtatroṣya rajanīḥ pañca vindyādbahu suvarṇakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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