महाभारत 3.82.59सरस्वतीं समासाद्य तर्पयेत्पितृदेवताःसारस्वतेषु लोकेषु मोदते नात्र संशयःsarasvatīṃ samāsādya tarpayetpitṛdevatāḥsārasvateṣu lokeṣu modate nātra saṃśayaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें