महाभारत 3.82.5
ततो हि सा सरिच्छ्रेष्ठा नदीनामुत्तमा नदीप्लक्षाद्देवी स्रुता राजन्महापुण्या सरस्वती
tato hi sā saricchreṣṭhā nadīnāmuttamā nadīplakṣāddevī srutā rājanmahāpuṇyā sarasvatī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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