महाभारत 3.82.71ततो गयां समासाद्य ब्रह्मचारी जितेन्द्रियःअश्वमेधमवाप्नोति गमनादेव भारतtato gayāṃ samāsādya brahmacārī jitendriyaḥaśvamedhamavāpnoti gamanādeva bhārataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें