महाभारत 3.82.78
तेषूपस्पृश्य राजेन्द्र पदेषु नृपसत्तमयत्किंचिदशुभं कर्म तत्प्रणश्यति भारत
teṣūpaspṛśya rājendra padeṣu nṛpasattamayatkiṃcidaśubhaṃ karma tatpraṇaśyati bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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