महाभारत 3.82.83
योनिद्वारं च तत्रैव विश्रुतं भरतर्षभतत्राभिगम्य मुच्येत पुरुषो योनिसंकरात्
yonidvāraṃ ca tatraiva viśrutaṃ bharatarṣabhatatrābhigamya mucyeta puruṣo yonisaṃkarāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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