महाभारत 3.82.97
गण्डकीं तु समासाद्य सर्वतीर्थजलोद्भवाम्वाजपेयमवाप्नोति सूर्यलोकं च गच्छति
gaṇḍakīṃ tu samāsādya sarvatīrthajalodbhavāmvājapeyamavāpnoti sūryalokaṃ ca gacchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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