महाभारत 3.86.18
तत्र पिण्डारकं नाम तापसाचरितं शुभम्उज्जयन्तश्च शिखरी क्षिप्रं सिद्धिकरो महान्
tatra piṇḍārakaṃ nāma tāpasācaritaṃ śubhamujjayantaśca śikharī kṣipraṃ siddhikaro mahān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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