महाभारत 3.86.20
पुण्ये गिरौ सुराष्ट्रेषु मृगपक्षिनिषेवितेउज्जयन्ते स्म तप्ताङ्गो नाकपृष्ठे महीयते
puṇye girau surāṣṭreṣu mṛgapakṣiniṣeviteujjayante sma taptāṅgo nākapṛṣṭhe mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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