महाभारत 3.87.11
जम्बूमार्गो महाराज ऋषीणां भावितात्मनाम्आश्रमः शाम्यतां श्रेष्ठ मृगद्विजगणायुतः
jambūmārgo mahārāja ṛṣīṇāṃ bhāvitātmanāmāśramaḥ śāmyatāṃ śreṣṭha mṛgadvijagaṇāyutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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