महाभारत 3.87.14
अप्यत्र संस्तवार्थाय प्रजापतिरथो जगौपुष्करेषु कुरुश्रेष्ठ गाथां सुकृतिनां वर
apyatra saṃstavārthāya prajāpatiratho jagaupuṣkareṣu kuruśreṣṭha gāthāṃ sukṛtināṃ vara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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