महाभारत 3.87.2
प्रियङ्ग्वाम्रवनोपेता वानीरवनमालिनीप्रत्यक्स्रोता नदी पुण्या नर्मदा तत्र भारत
priyaṅgvāmravanopetā vānīravanamālinīpratyaksrotā nadī puṇyā narmadā tatra bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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