महाभारत 3.87.4
वैडूर्यशिखरो नाम पुण्यो गिरिवरः शुभःदिव्यपुष्पफलास्तत्र पादपा हरितच्छदाः
vaiḍūryaśikharo nāma puṇyo girivaraḥ śubhaḥdivyapuṣpaphalāstatra pādapā haritacchadāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें