महाभारत 3.87.6
बह्वाश्चर्यं महाराज दृश्यते तत्र पर्वतेपुण्ये स्वर्गोपमे दिव्ये नित्यं देवर्षिसेविते
bahvāścaryaṃ mahārāja dṛśyate tatra parvatepuṇye svargopame divye nityaṃ devarṣisevite
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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