महाभारत 3.89.4
स पृष्टः पाण्डुपुत्रेण प्रीयमाणो महामनाःउवाच श्लक्ष्णया वाचा हर्षयन्निव पाण्डवान्
sa pṛṣṭaḥ pāṇḍuputreṇa prīyamāṇo mahāmanāḥuvāca ślakṣṇayā vācā harṣayanniva pāṇḍavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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