महाभारत 3.92.10तानलक्ष्मीसमाविष्टान्दर्पोपहतचेतसःदैतेयान्दानवांश्चैव कलिरप्याविशत्ततःtānalakṣmīsamāviṣṭāndarpopahatacetasaḥdaiteyāndānavāṃścaiva kalirapyāviśattataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें