महाभारत 3.92.13
देवास्तु सागरांश्चैव सरितश्च सरांसि चअभ्यगच्छन्धर्मशीलाः पुण्यान्यायतनानि च
devāstu sāgarāṃścaiva saritaśca sarāṃsi caabhyagacchandharmaśīlāḥ puṇyānyāyatanāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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