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महाभारत 3.92.16
तथा त्वमपि राजेन्द्र स्नात्वा तीर्थेषु सानुजःपुनर्वेत्स्यसि तां लक्ष्मीमेष पन्थाः सनातनः
tathā tvamapi rājendra snātvā tīrtheṣu sānujaḥpunarvetsyasi tāṃ lakṣmīmeṣa panthāḥ sanātanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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