महाभारत 3.92.2
परांश्च निर्गुणान्मन्ये न च धर्मरतानपिते च लोमश लोकेऽस्मिन्नृध्यन्ते केन केतुना
parāṃśca nirguṇānmanye na ca dharmaratānapite ca lomaśa loke'sminnṛdhyante kena ketunā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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