महाभारत 3.92.7
तीर्थानि देवा विविशुर्नाविशन्भारतासुराःतानधर्मकृतो दर्पः पूर्वमेव समाविशत्
tīrthāni devā viviśurnāviśanbhāratāsurāḥtānadharmakṛto darpaḥ pūrvameva samāviśat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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