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महाभारत 3.95.20
लोपामुद्रोवाचईशोऽसि तपसा सर्वं समाहर्तुमिहेश्वरक्षणेन जीवलोके यद्वसु किंचन विद्यते
lopāmudrovācaīśo'si tapasā sarvaṃ samāhartumiheśvarakṣaṇena jīvaloke yadvasu kiṃcana vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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