महाभारत 3.95.2
राजन्निवेशे बुद्धिर्मे वर्तते पुत्रकारणात्वरये त्वां महीपाल लोपामुद्रां प्रयच्छ मे
rājanniveśe buddhirme vartate putrakāraṇātvaraye tvāṃ mahīpāla lopāmudrāṃ prayaccha me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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