महाभारत 3.95.4
ततः स भार्यामभ्येत्य प्रोवाच पृथिवीपतिःमहर्षिर्वीर्यवानेष क्रुद्धः शापाग्निना दहेत्
tataḥ sa bhāryāmabhyetya provāca pṛthivīpatiḥmaharṣirvīryavāneṣa kruddhaḥ śāpāgninā dahet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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