महाभारत 3.98.2
लोमश उवाच · lomaśa uvāca
शृणु राजन्कथां दिव्यामद्भुतामतिमानुषीम्अगस्त्यस्य महाराज प्रभावममितात्मनः
śṛṇu rājankathāṃ divyāmadbhutāmatimānuṣīmagastyasya mahārāja prabhāvamamitātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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